JNU में फिर गहराया विवाद: मोदी-शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी

 

JNU में फिर गहराया विवाद: मोदी-शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी, यूनिवर्सिटी प्रशासन की सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सोमवार रात कैंपस में कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी 2026 की रात की बताई जा रही है। कैंपस में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के एक समूह ने "मोदी-शाह की कब्र खुदेगी" जैसे विवादित नारे लगाए।

करीब 35 सेकंड का एक वीडियो मंगलवार को सार्वजनिक हुआ, जिसमें छात्रों को कैंपस की सड़कों पर नारेबाजी करते हुए देखा जा सकता है।




यूनिवर्सिटी प्रशासन का कड़ा रुख

घटना पर संज्ञान लेते हुए JNU प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे शिक्षण संस्थान की मर्यादा से समझौता नहीं करेंगे। प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया:

"हम विश्वविद्यालय को नफरत फैलाने की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। कैंपस की शांति भंग करने वाले और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले छात्रों को चिन्हित किया जा रहा है।"

प्रमुख कार्रवाई की तैयारी:

  • सस्पेंशन: वीडियो में नजर आ रहे आरोपी छात्रों को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

  • जांच समिति: मामले की गहराई से जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई है।

  • सुरक्षा व्यवस्था: कैंपस के भीतर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।


दरअसल, एक दिन पहले 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था।

JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं।

मिश्रा ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करते थे। वे किसी के लिए निर्देशित नहीं थे।

हालांकि मंगलवार दोपहर को JNU प्रशासन ने वसंत कुंज पुलिस को लेटर लिखा, जिसमें साबरमती हॉस्टल के बाहर नारे लगाने के लिए FIR दर्ज करने की मांग की गई है।



राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना के बाद एक बार फिर JNU में अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अनुशासन की बहस छिड़ गई है। जहाँ एक पक्ष इसे छात्रों का गुस्सा बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ 'हेट स्पीच' करार दे रहा है।
कांग्रेस बोली- ये गुस्सा जाहिर करने का तरीका, BJP ने कहा- सपोले बिलबिला रहे
कांग्रेस नेता उदित राज- यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है। JNU में 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुस्सा है। उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। उनके साथ नाइंसाफी हुई है। SC का फैसला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा- जो भी अशांति फैलाएगा, वह जेल जाएगा। यह BJP का राज है; यहां अशांति फैलाने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दंगा करने वालों की जगह जेल में है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह- JNU 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का ऑफिस बन गया है। मैं 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' से कहना चाहता हूं कि जो लोग उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोगों का समर्थन करते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान समर्थक भावनाएं रखीं और चिकन नेक कॉरिडोर को अलग करने की बात की, वे देशद्रोही हैं।
CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह- पिछले 50 सालों में देश में इस तरह के नारे 100 बार लगाए गए हैं। हालांकि इस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। नारे लगाते समय उन्हें बहुत सावधान रहना चाहिए।
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा- कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं। ये अफजल गुरू के लिए भी नारे लगाते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों-नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं, लेकिन इनके नारे बस नारे तक ही सीमित हैं। यह बस उनकी छटपटाहट है।

“यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों के आधार पर है।













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