नई दिल्ली/ग्लोबल डेस्क: डिजिटल युग में तकनीक जहाँ वरदान साबित हो रही है, वहीं इसका एक भयावह पहलू भी सामने आया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया की सार्वजनिक टाइमलाइन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित महिलाओं की अश्लील और नग्न तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनिया भर की सरकारें और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस "डिजिटल हिंसा" को रोकने में अक्षम नजर आ रही हैं।
तकनीक का हथियार की तरह इस्तेमाल
AI की मदद से अपराधी किसी भी महिला की सामान्य तस्वीर को कुछ सेकंड में अश्लील फोटो में बदल देते हैं। ये तस्वीरें इतनी असली लगती हैं कि पीड़ित के लिए यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि तस्वीर फर्जी है।
देशों और सरकारों की निष्क्रियता: 3 बड़े कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक समस्या पर देशों द्वारा कड़ी कार्रवाई न करने के पीछे मुख्य कारण ये हैं:
नियमों और प्रक्रियाओं की कमी: अधिकांश देशों के पास अभी भी 'AI के लिए कानून नहीं हैं। पुराने IT एक्ट इन मामलों में प्रभावी नहीं होते।
अंतर्राष्ट्रीय अपराध: अपराधी अक्सर दूसरे देश के सर्वर का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना स्थानीय पुलिस के लिए लगभग असंभव हो जाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की ढिलाई: एक्स (X), इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री को रिपोर्ट किए जाने के बावजूद, उन्हें हटाने की प्रक्रिया बहुत धीमी है।
पीड़ित महिलाओं पर प्रभाव
यह केवल एक फोटो का मामला नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर सीधा हमला है। कई मामलों में इसका उपयोग 'सेक्सटॉर्शन' (Sextortion) और ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा रहा है।
निष्कर्ष और समाधान
जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साझा "AI एथिक्स कोड" नहीं बनाया जाता और अपराधी को जेल भेजने के सख्त प्रावधान नहीं होते, तब तक महिलाएं इंटरनेट पर असुरक्षित रहेंगी। सरकारों को अब "प्रतीक्षा करें और देखें" की नीति छोड़कर सख्त डिजिटल सुरक्षा कानून लागू करने होंगे।
“यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों के आधार पर है।”
0 Comments